विभूति योग: परम ब्रह्म का प्रकाश और हृदय में स्थित ईश्वर का रहस्य (श्लोक 11-20)
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इस एपिशोड में “गीता-योग: अध्यात्मिक प्रबोधन की श्रवण यात्रा” के अंतर्गत भगवद्गीता के विभूति योग पर आधारित श्रीकृष्ण और अर्जुन के दिव्य संवाद का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण स्वयं को सृष्टि का आदि, मध्य और अंत बताते हुए अपनी अनंत महिमा और सर्वव्यापकता का उद्घाटन करते हैं।
अर्जुन, पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ, भगवान को परम ब्रह्म और सर्वोच्च सत्ता के रूप में स्वीकार करते हुए उनकी विभूतियों को विस्तार से जानने की जिज्ञासा व्यक्त करता है। इसके उत्तर में श्रीकृष्ण यह स्पष्ट करते हैं कि वे प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित आत्मा हैं और सच्चे भक्तों के अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करते हैं।
यह एपिशोड ईश्वर की असीम शक्ति, उनकी करुणा और उनकी सर्वव्यापक उपस्थिति के दार्शनिक स्वरूप को उजागर करता है। साथ ही यह हमें यह समझने की प्रेरणा देता है कि जब हम श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक जागरूकता के साथ ईश्वर को स्वीकार करते हैं, तब जीवन में वास्तविक ज्ञान और आंतरिक शांति का अनुभव संभव होता है।
यह चर्चा साधक को अपने भीतर स्थित दिव्यता को पहचानने और भगवान के साथ गहरे आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने की दिशा में प्रेरित करती है।