इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry) Podcast By Lokesh Gulyani cover art

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

By: Lokesh Gulyani
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Spoken word poetry in Hindi by Lokesh GulyaniCopyright Lokesh Gulyani Philosophy Social Sciences
Episodes
  • Episode 57 - तीसरी घंटी
    Mar 22 2026
    मुझे तो याद नहीं पड़ता कोई ऐसा क्षण जिसे मैं कह सकूं कि मैं सही समय पर सही जगह खड़ा था। मैं हमेशा ग़लत समय पर एंट्री - एग्जिट लेता रहा।
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  • Episode 56 - कसप
    Feb 11 2026
    वो अभी भी राह देख रहा है उसकी कि वो कभी लौट कर आए और उसे कहे कि ' अब तुम भी आगे बढ़ सकते हो, तुम मुझसे मुक्त हुए ' पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं और ये रिश्ता कसप के डीडी की तरह मारगांठ बनकर उसकी कुंडलिनी में उतर गया और उसके अगले जन्म का प्रारब्ध भी बन गया।
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  • Episode 55 - Nervous Ninetees
    Feb 3 2026
    दूर कहीं एक मुसाफ़िर इसी ओर आता दिख रहा है। मैं अंगीठी पर कहवा चढ़ा देता हूं। आज कितने दिनों बाद कोई मेरी ड्यौढ़ी चढ़ेगा। बहुत दिन हो गए मुझे किसी हाड़-मांस के पुतले से बात किए हुए।
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